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Sunday, December 5, 2021

पाकिस्तान में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने सिख को बनाया उम्मीदवार, 'तालिबानी' इलाके से लड़ेगा चुनाव

इस्लामाबाद पाकिस्तान की कट्टरपंथी पार्टी ने एक सिख व्यक्ति को खैबर पख्तूनख्वा के निकाय चुनावों में उम्मीदवार बनाया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रधानमंत्री इमरान खान का गृह राज्य भी है। जमात-ए-इस्लामी के प्रांतीय अध्यक्ष सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने शनिवार को ऐलान किया कि हरदीत सिंह नाम का एक सिख युवक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा जिले में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार होगा। इस ऐलान के बाद से ही पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर जमात-ए-इस्लामी ट्रेंड कर रहा है। इस इलाके में टीटीपी की मौजूदगी द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा के 17 जिलों में स्थानीय निकायों के लिए चुनाव 17 दिसंबर से शुरू हो रहे हैं। सीनेटर मुश्ताक ने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में उनकी पार्टी का टिकट पाने के लिए कई अन्य अल्पसंख्यक उम्मीदवार भी जोर आजमाइश कर रहे थे, लेकिन उनकी पार्टी ने हरदीत सिंह को चुना। वे पाकिस्तान के सबसे कट्टरपंथी क्षेत्रों में से एक में चुनाव लड़ेंगे। इस प्रांत में तहरीक-ए तालिबान-पाकिस्तान (TTP) की भी सक्रिय उपस्थिति है। कट्टरपंथियों के गढ़ में चुनौती देगा सिख उम्मीदवार उन्होंने कहा कि हमारे पास खैबर पख्तूनख्वा में अल्पसंख्यक नेताओं की मजबूत फौज है। वे 24 घंटे काम करते हैं और उनमें से कई अल्पसंख्यक उम्मीदवार स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिख उम्मीदवार हरदीत सिंह की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि वह खैबर जिले से चुनाव लड़ेंगे। यह जिला बहुसंख्यक अफरीदी आबादी वाला एक पारंपरिक पश्तून क्षेत्र है। यह पूरा इलाका अफगानिस्तान से सटा हुआ है। कट्टरपंथी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए भी बदनाम है। कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी ने सिख को क्यों दिया टिकट पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने हरदीत सिंह को उम्मीदवार बनाने के लिए जमात-ए-इस्लामी के फैसले की तारीफ की है। हामिद मीर ने कहा कि एक प्रमुख इस्लामी और कट्टरपंथी पार्टी होने के बावजूद जमात-ए-इस्लामी के गैर मुस्लिम को उम्मीदवार बनाने के पीछे पीछे एक राजनीतिक रणनीति है। पाकिस्तान के प्रांतीय चुनावों में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सीटें आरक्षित हैं। कई पार्टियों ने इन सीटों पर अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे हैं। यहां तक कि जमात-ए-इस्लामी भी इन सीटों को जीतना चाह रही है और इसलिए एक सिख उम्मीदवार को नामित किया है। पाकिस्तान के संविधान में अल्पसंख्यकों को ये अधिकार पाकिस्तान के सिविल इंफॉर्मेशन पोर्टल के अनुसार, पाकिस्तान का संविधान प्रांतीय विधानसभाओं में एक कोटा आरक्षित करके अल्पसंख्यकों के राजनीतिक समावेश की गारंटी देता है। संविधान के अनुच्छेद 51(4) में अल्पसंख्यकों के लिए पाकिस्तानी संसद में दस सीटें आरक्षित हैं। अनुच्छेद 106 भी सभी प्रांतीय विधानसभाओं में गैर-मुस्लिम आरक्षित सीटों की गारंटी देता है। अधिनियम की धारा 48 गैर-मुस्लिमों के निर्वाचन के लिए विशेष उपाय करने का अधिकार देता है। पाकिस्तानी सोशल मीडिया में हो रही चर्चा पाकिस्तान की सोशल मीडिया में भी जमात-ए-इस्लामी के गैर मुस्लिम को उम्मीदवार बनाने की चर्चा हो रही है। कई लोगोंने कहा कि यह सीट पहले से ही अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित थी। ऐसे में जमात-ए-इस्लामी ने सिख को उम्मीदवार बनाकर कोई अहसान नहीं किया है। कई लोगों ने शेयर किए जा रहे पोस्टर की जांच करवाने की बात भी की है।


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