छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां न सिर्फ रावण को दशहरा के दूसरे दिन जलाया जाता है बल्कि बिल्कुल आधुनिक तरीके से तलाब के बीचों बीच जलाए जाते हैं. ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि गांव के तालाब में अक्सर ग्रामीणों के डूबने से मौत हो जाया करती थी, लेकिन अब उसी तालाब के बीच में अब रावण का दहन होने से तालाब में अब किसी की अकाल मौत नहीं होती. यही वजह है कि ग्रामीणों ने अब इसे एक परंपरा बना ली है. करीब 20 वर्षों से बेमेतरा जिले के ग्रामीण इसी तरह रावण दहन करते आ रहे हैं. बता दें कि ग्रामीण 30 फीट का रावण बनाते हैं इसे बकायदा पानी मे डूबने से बचने के लिए 12 लकड़ी के पत्ते में 8 ड्रम को बांधकर तैयार करते हैं. तैयार करने में 1 सप्ताह का समय लगता है और इसे बकायदा रिमोट कंट्रोल से जलाया जाता है.from Latest News छत्तीसगढ़ News18 हिंदी https://ift.tt/2NRx8a0

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