छत्तीसगढ़ में 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे के प्रमुख 'बाहर रैनी' रस्म को बीते शनिवार को पूरे विधि विधान के साथ किया गिया. बता दें कि करीब 700 वर्षों से चली आ रही परंपरा आज भी बस्तर में देखी जा सकती है. सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार बस्तर महाराजा से आदिवासी नाराज हो गए थे और राजा को अपने बीच बुलाने के लिए एक योजना बनाई थी. राजा के विशालकाय रथ को देर रात आदिवासी ग्रामीण चुराकर ऐसी जगह ले गए, जिसे ढूंढने के लिए राज निकलते हैं. फिर बस्तर महाराज को यह एहसास हो जाता है कि प्रजा उनसे नाराज है. राजा को यह संदेश भी मिल जाता है कि वह रथ लेने अगर निकले तो अपने लाव लश्कर के साथ निकले. आदिवासी प्रजा के साथ जमीन पर बैठकर नया अन्न ग्रहण करे. ऐसे में सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी बस्तर में विद्यमान है. आज भी राजपरिवार अपने लाव लश्कर के साथ यहां पहुंचते हैं. फिर प्रजा के साथ बैठकर उनकी सभी नाराजगी को दूर कर विशालकाय रथ को वापस मां दंतेश्वरी मंदिर लाते हैं. इसे ही 'बाहर रैनी' रस्म कहते हैं.from Latest News छत्तीसगढ़ News18 हिंदी https://ift.tt/2yVFfgi

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